जिंदगी की असलियत की सीख-- डॉ. कौशल्या ठाकुर

कोरोना ने  ज़िन्दगी की असलियत से रूबरू कराया है।

नकली का भेद मिटाकर असली चेहरा दिखाया है

 बंद झरोखे से दुनिया की तबाही का मंज़र दिखाया है

 कोरोना ने  ज़िन्दगी की असलियत से रूबरू कराया है।

 

 अमीर -गरीब और ऊंच - नीच  का भेदभाव मिटाया है

 तंग हालात में भी गुजर बसर करना सिखाया है।

 घर के खाने ने फास्ट फूड जैसा जायका दिलाया है

 कोरोना ने  ज़िन्दगी की असलियत से रूबरू कराया है।

 

  कपड़े, जूते-चप्पलों को अलमारियों में बंद कराया है

  रोज तैयार होकर घर से  निकलने का झंझट मुकाया है

  सभी संस्थानों और कार्यालयों को बंद करवाया है

  कोरोना ने  ज़िन्दगी की असलियत से रूबरू कराया है।

  

  संयुक्त परिवार और सहयोग की भावना को जगाया है

  शहर में रहने वालों को गांव का रूख करवाया है

  विदेश में रहने  वालों को अपना देश याद आया है

  कोरोना ने  ज़िन्दगी की असलियत से रूबरू कराया है।

  

 महंगी गाड़ी  में बैठने वालों को पैदल चलना सिखाया है

 दूरियों ने नजदीकियों का एहसास  करवाया है

 राशन,सब्जी के लिए गोल दायरे में खड़ा होना सिखाया है

 कोरोना ने  ज़िन्दगी की असलियत से रूबरू कराया है।

 

 मास्क ने हंसी और चेहरे की रौनक को छिपाया है

 आंखों ही आंखों से बतियाने का इल्म  सिखाया है

 नमस्ते की परम्परा को पुनर्जीवित करवाया है

 कोरोना ने  ज़िन्दगी की असलियत से रूबरू कराया है।

* डॉ कौशल्या ठाकुर
अधीक्षक
प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय
शिमला

 

1 comments:


Contact form

Search This Blog