चांद के साथ मुस्कुराये माँ
दर्द में साथ भी निभाये मां
नर्म दिल जब कठोर करती है
कायदा ज़ीस्त का पढ़ाये मां
जिसका बच्चा भटकने वाला हो
बारहा आईना दिखाये मां
आज ठँडी हवा यूँ चलती है
जैसे लोरी हमें सुनाये मां
घर की दहलीज़ पे खड़ी होकर
दूर तक ज़िन्दगी बिछाये मां
मां की हस्ती भी ऐसी हस्ती है
कह न पायें समझ भी जाये माँ
कल्पना कुछ भी भूल करते हो
बात बच्चों की सब भुलाये मां
कल्पना गागडा़
प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय
शिमला, हिमाचल प्रदेश
प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय
शिमला, हिमाचल प्रदेश



मां पर बेहतरीन रचना
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